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अमृत प्रवचन

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Price:
Rs. 60.00
ISBN:
9788131004661
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Book Description

श्रीमद्भागवत की उपलब्धि है परीक्षित का आत्मतत्व को प्राप्त होना। यही भागवत् दशा है। कथा श्रवण से पूर्व परीक्षित मृत्यु भय से भरा हुआ था बाद में उसे ज्ञात हो गया कि उसे कोई मार नहीं सकता। वह तो अमर है। मृत्यु शरीर की होती है, और वह प्रत्येक क्षण हो रही है। आज विज्ञान भी स्वीकार करता है कि प्रत्येक सात वर्षों में शरीर का एक-एक कोष, एक-एक कण बदल जाता है-पूरी तरह से। जहाँ तक भौतिक तत्वों के विनष्ट होने की बात है, तो वह बदलते हैं अपने रूप को-विनाश उनका भी नहीं होता। अमरता का अनुभव करने के बाद तत्वज्ञानी शरीर को छोड़ता है। ऐसा करने में उसे किसी प्रकार की पीड़ा या वेदना नहीं होती। सत्संग का प्रतिफल इस अमृतत्व की अनुभूति है-और कुछ नहीं।


Other Details

Language:
Hindi
Pages:
128
Binding:
Paperback
Publish Year:
2012


 

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